यूरोपीय पंजाबी साहित्य अकादमी ने प्रिंसिपल चन्नन सिंह घुम्मण की स्मृति में शिक्षा, साहित्य और समाज विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की

इटली/यूरोप (के.एल. जीत वालिया): अंतरराष्ट्रीय फादर्स डे के अवसर पर यूरोपीय पंजाबी साहित्य अकादमी द्वारा “शिक्षा, साहित्य और समाज” विषय पर एक ऑनलाइन साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दिवंगत प्रिंसिपल चन्नन सिंह घुम्मण की स्मृति को समर्पित था, जिसमें शिक्षा, साहित्य और समाज के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदान पर विस्तृत चर्चा की गई।

 

अकादमी के अध्यक्ष बलविंदर सिंह चाहल ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि समाज में बच्चों और विद्यार्थियों की सफलता के पीछे प्रिंसिपल चन्नन सिंह घुम्मण जैसे महान शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

 

प्रिंसिपल घुम्मण के पूर्व छात्र और इंग्लैंड के प्रतिष्ठित व्यवसायी प्रीतवंत सिंह भुल्लर ने उन्हें एक महान शिक्षक बताते हुए कहा कि वे विद्यार्थियों के साथ मित्रवत व्यवहार रखते थे और हमेशा अनुशासित एवं सुसज्जित व्यक्तित्व के धनी थे।

 

प्रसिद्ध पंजाबी गायक सुरिंदर लाड़ी ने उन्हें एक प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि आज भी अनेक लोग उनके दिखाए मार्ग पर चलकर सफलता प्राप्त कर रहे हैं।

 

उनके सहयोगी प्रो. इंदरजीत सिंह पड्डा ने उन्हें उत्कृष्ट शिक्षक और मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उन्होंने अनेक विद्यार्थियों को जीवन में ऊँचाइयाँ हासिल करने की प्रेरणा दी।

 

पंजाबी गीतकार एवं मंच संचालक बलदेव राही ने कहा कि प्रिंसिपल घुम्मण एक संवेदनशील और प्रेरणादायी व्यक्तित्व थे, जो हमेशा दूसरों का सहारा बने रहे। उन्होंने कहा कि उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में प्रतिष्ठित पंजाबी हस्तियों की उपस्थिति उनके प्रति लोगों के सम्मान का प्रमाण थी।

 

शिक्षाविद एवं साहित्यकार डॉ. भूपिंदर सिंह बेदी ने शिक्षा, साहित्य और समाज के संबंध पर अपने विचार रखते हुए कहा कि गुरु के बिना शिक्षा नहीं, शिक्षा के बिना साहित्य नहीं और श्रेष्ठ साहित्य ही एक अच्छे समाज का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि प्रिंसिपल चन्नन सिंह घुम्मण का जीवन इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।

 

प्रिंसिपल घुम्मण की पुत्री एवं पंजाबी साहित्यकार रूप दविंदर कौर नाहल ने इस अनूठे कार्यक्रम के आयोजन के लिए अकादमी का धन्यवाद किया। उन्होंने अपने पिता द्वारा शिक्षा, समाज और परिवार के लिए किए गए कार्यों को याद करते हुए कहा कि आज वे जो कुछ भी हैं, वह अपने पिता के मार्गदर्शन और संस्कारों की बदौलत हैं।

 

कार्यक्रम के दौरान बलविंदर सिंह चाहल, दलजिंदर राहिल, डॉ. भूपिंदर सिंह बेदी, गुरप्रीत कौर गैदू, बलदेव राही और सुरिंदर लाड़ी ने अपने विचार साझा किए तथा गीत, कविताएँ और शेर भी प्रस्तुत किए।

 

कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन अकादमी के महासचिव दलजिंदर राहिल ने किया। इंग्लैंड से बलजीत कौर विशेष रूप से शामिल हुईं। अंत में प्रो. जसपाल सिंह ने सभी अतिथियों और वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया

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