अमृतसर, 30 जून (कमल शमशेर सिंह): पंजाब अपनी समृद्ध ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। इन्हीं धरोहरों में एक अनमोल रत्न है पुल कंजरी, जो अमृतसर जिले में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित है। यह केवल एक प्राचीन पुल नहीं, बल्कि महाराजा रणजीत सिंह के गौरवशाली शासन, पंजाब की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान का जीवंत प्रतीक है।
इतिहासकारों के अनुसार, पुल कंजरी का निर्माण 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में महाराजा रणजीत सिंह ने करवाया था। मान्यता है कि एक बार लाहौर से अमृतसर आते समय प्रसिद्ध नृत्यांगना मोरां की एक जूती इस स्थान के पास एक छोटे नाले में गिर गई थी। इसके बाद महाराजा ने लोगों की सुविधा के लिए यहां एक मजबूत पुल बनवाने का आदेश दिया। समय के साथ यह स्थान “पुल मोरां” से बदलकर पुल कंजरी के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
सिख साम्राज्य के समय पुल कंजरी लाहौर और अमृतसर को जोड़ने वाले शाही मार्ग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। यहां यात्रियों के ठहरने के लिए सराय, स्नान के लिए बावली, घोड़ों के लिए अस्तबल, मस्जिद, मंदिर तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की गई थीं। यह परिसर उस समय की उत्कृष्ट वास्तुकला और महाराजा रणजीत सिंह की जनकल्याणकारी सोच का परिचायक है।
साल 1947 में भारत के विभाजन के बाद यह ऐतिहासिक स्थल अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद निकट आ गया। विभाजन के कारण इसकी रौनक कुछ समय के लिए कम अवश्य हुई, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व कभी कम नहीं हुआ। आज भी देश-विदेश से हजारों पर्यटक, इतिहासकार और विरासत प्रेमी इस स्थल को देखने आते हैं।
पंजाब सरकार और पुरातत्व विभाग समय-समय पर इस धरोहर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण का कार्य करते रहे हैं। यहां मौजूद प्राचीन पुल, बावली और अन्य ऐतिहासिक संरचनाएं आज भी महाराजा रणजीत सिंह के स्वर्णिम शासन की याद दिलाती हैं। शाम के समय यहां का शांत वातावरण, हरियाली और सीमा क्षेत्र का दृश्य पर्यटकों को एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है।
इतिहासकारों का मानना है कि पुल कंजरी केवल ईंट और पत्थरों से बना एक स्मारक नहीं, बल्कि पंजाब की साझा संस्कृति, धार्मिक सद्भाव और जनकल्याण की भावना का प्रतीक है। यह धरोहर नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ती है और विरासत संरक्षण का संदेश देती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस ऐतिहासिक स्थल का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए ताकि देश और विदेश से अधिक से अधिक पर्यटक यहां आएं और पंजाब की इस अमूल्य धरोहर को निकट से जान सकें। आज भी पुल कंजरी अपनी ऐतिहासिक गरिमा के साथ पंजाब के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बना हुआ है।