सूफ़ी गायक मनमीत सिंह सैण की याद को समर्पित पुस्तक “ग़म खाने दी जाच नहीं” जनता को समर्पित

अमृतसर, 18 नवंबर (के. एल. जीत वालिया) – सूफ़ी गायक ‘सैण ब्रदर्स’ के पिता शंकर सुखदेव सिंह वड्ढन द्वारा संपादित पुस्तक “ग़म खाने दी जाच नहीं” को इंद्रजीत सिंह बासरके, चेयरमैन, स्माल स्केल इंडस्ट्री, भारत सरकार, ने अपने कार्यालय — शेरशाह सूरी रोड, गुरु हरगोबिंद एवेन्यू — में आम जनता को समर्पित किया।इस अवसर पर भावुक शब्दों में संबोधित करते हुए इंद्रजीत सिंह बासरके ने कहा कि सूफ़ी गायक मनमीत सिंह सैण कुछ वर्ष पूर्व एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के चलते युवावस्था में ही परिवार को असहनीय विछोह दे गए थे। उनकी प्यारी याद में, उनके पिता द्वारा संपादित इस पुस्तक में मनमीत की संगीत यात्रा और उनके अंदर के भावों का चित्रण किया गया है।

बासरके ने कहा कि मनमीत सिंह सैण और किरणपाल सिंह सैण (केपी) ने “सैण ब्रदर्स” नाम से बहुत कम समय में सूफ़ी गायकी के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई और लोगों के दिलों में स्थान बनाया।डॉ. आत्मा सिंह गिल, प्रिंसिपल रंजीत सिंह, मर्कस पाल गुमटाला, सुखबीर सिंह खुरमणियां आदि ने संबोधन में कहा कि लेखक, कलाकार और सूफ़ी गायक अपनी रचनाओं के माध्यम से सदैव लोगों के मन में जीवित रहते हैं। उन्होंने बताया कि यह शंकर सुखदेव सिंह वड्ढन की साहित्य क्षेत्र में दूसरी पुस्तक है।वक्ताओं ने काव्य-संग्रह में शामिल रचनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि पुस्तक में विछोह का दर्द, सामाजिक भ्रष्टाचार, ऊँच–नीच की विसंगति, सांस्कृतिक मूल्य, पारिवारिक नैतिकता जैसे विषयों को रोचक और व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि लेखक अपनी कलम के माध्यम से मन के बोझ को हल्का करता है और यह कृति उसकी भावनाओं तथा ममता का जीवंत प्रतीक है।इस अवसर पर परिवार के सदस्यों के साथ-साथ प्रिंसिपल रंजीत सिंह बासरके, अजमेर सिंह बासरके, सनप्रीत सिंह, लवप्रीत सिंह, सतबीर सिंह, गुरदेव सिंह, अमनदीप सिंह, किरणपाल सिंह केपी, एनी सिंह, दलबीर सिंह लोहुका, मर्कस पाल गुमटाला, करमजीत सिंह, चेयरमैन मनमोहन सिंह बासरके (यादगारी ट्रस्ट), तथा डी.पी. पब्लिशर्स से आत्मजीत कौर और सुखबीर सिंह खुरमणियां उपस्थित थे।

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