नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी बहस के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) कराने की घोषणा की है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, पात्र नागरिकों के नाम जोड़ना और मतदाता विवरण में मौजूद गलतियों को सुधारना है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब देश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा जारी है।
क्या है SSR और क्यों है जरूरी?
SSR यानी स्पेशल समरी रिवीजन मतदाता सूची को संशोधित और अपडेट करने की नियमित प्रक्रिया है। इसके तहत पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। जिन मतदाताओं के नाम में गलती है, वे सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। नियमों के अनुसार, किसी अपात्र या गलत प्रविष्टि को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान है।
इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि पात्र मतदाता सूची में शामिल हों और मतदाता सूची की जानकारी सही बनी रहे।
किन 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा SSR?
चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार, इस चरण में निम्नलिखित राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं:
- उत्तर प्रदेश
- उत्तराखंड
- पंजाब
- बिहार
- पश्चिम बंगाल
- मध्य प्रदेश
- राजस्थान
- तमिलनाडु
- गुजरात
- केरल
- असम
- छत्तीसगढ़
- मणिपुर
- गोवा
- पुडुचेरी
- लक्षद्वीप
- अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और गुजरात जैसे राज्य भी शामिल हैं, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।
कब जारी होगी मतदाता सूची?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस चरण में मतदाता सूची का प्रारूप 12 नवंबर 2026 को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम है। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 11 दिसंबर 2026 बताई गई है। अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित किए जाने की जानकारी दी गई है।
मतदाताओं को अपने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी या चुनाव आयोग की आधिकारिक सूचना से तारीखों की पुष्टि करनी चाहिए, क्योंकि कार्यक्रम से संबंधित विस्तृत निर्देशों का पालन जरूरी है।
नए मतदाताओं के लिए क्या है मौका?
ऐसे युवा जो निर्धारित पात्रता तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे नियमों के अनुसार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने 1 जनवरी 2027 को पात्रता तिथि के रूप में निर्धारित किया है। इसके अलावा, आगे की पात्रता तिथियों पर 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के आवेदन भी संबंधित नियमों के तहत लिए जा सकते हैं।
यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो उसे नाम जुड़वाने के लिए निर्धारित आवेदन प्रक्रिया अपनानी चाहिए। पहले से दर्ज नाम, पता और अन्य विवरण भी जांच लेना उपयोगी रहेगा।
SIR और SSR में क्या अंतर है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जबकि SSR मतदाता सूची को नियमित रूप से अपडेट करने के लिए किया जाने वाला विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण है। दोनों का उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना है, लेकिन इनके तहत अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और कार्यक्रम अलग हो सकते हैं।
SIR को लेकर जारी विवाद के बीच SSR की घोषणा से मतदाताओं को नाम जोड़ने और विवरण में सुधार कराने का एक और अवसर मिलेगा। हालांकि, इस प्रक्रिया की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि पात्र नागरिकों के आवेदन समय पर लिए जाएं और दावों व आपत्तियों का नियमों के अनुसार निस्तारण किया जाए।
मतदाताओं के लिए सलाह: अपनी मतदाता सूची में नाम और विवरण की जांच करें। किसी तरह की त्रुटि होने पर निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करें।