नई दिल्ली :- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को युवाओं को रोजगार के लिए सक्षम बनाने की महत्वाकांक्षी पहल माना जाता है लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की हालिया रिपोर्ट ने इस योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CAG की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं जिनसे योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही और संभावित अनियमितताओं की तस्वीर उभरती है।
रिपोर्ट के अनुसार कई लाभार्थियों के बैंक अकाउंट नंबर संदिग्ध पाए गए हैं। कुछ मामलों में अकाउंट नंबर अधूरे थे तो कुछ जगह एक ही अकाउंट नंबर से कई लाभार्थियों को जोड़ा गया। इससे यह संदेह गहराता है कि भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा। इसके अलावा कई प्रशिक्षण केंद्रों में एक ही फोटो को बार बार अलग अलग उम्मीदवारों के नाम पर उपयोग किए जाने का भी खुलासा हुआ है।
CAG ने अपनी जांच में यह भी पाया कि कई प्रशिक्षण केंद्रों ने निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया। कुछ केंद्रों में प्रशिक्षण अवधि पूरी किए बिना ही प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। वहीं कई जगहों पर प्रशिक्षकों की योग्यता और बुनियादी सुविधाओं की कमी भी सामने आई। इससे यह सवाल उठता है कि क्या वास्तव में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल पाया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि योजना के तहत रोजगार दिलाने के दावों की उचित निगरानी नहीं की गई। कई लाभार्थियों को रोजगार मिलने के प्रमाण उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इससे योजना के वास्तविक प्रभाव पर संदेह पैदा होता है।
CAG के इन खुलासों के बाद अब सरकार और संबंधित मंत्रालय पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन कमियों को समय रहते दूर नहीं किया गया तो योजना का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। युवाओं के भविष्य से जुड़ी इस योजना में पारदर्शिता और कड़े निगरानी तंत्र की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।