श्रद्धालु नूरदीन की कब्र पर जूते-चप्पल फेंकने की परंपरा निभाते हैं। यह मेला सिख धर्म का तीसरा बड़ा पर्व है।
- माघी मेला हर वर्ष मकर संक्रांति पर मनाया जाता है
- नूरदीन की कब्र पर जूते फेंकना गुरु गोबिंद सिंह को धोखा देने का प्रतीक
- मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक व्यंजन उपलब्ध
- श्रद्धालु इतिहास और संस्कृति की झलक भी देखते हैं
Punjab news :- पंजाब के मुक्तसर शहर में हर वर्ष माघी मेला धूमधाम से मनाया जाता है यह सिख धर्म का तीसरा बड़ा पर्व है जिसमें हजारों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं माघी मेला मकर संक्रांति के दिन शुरू होता है और यह कई दिनों तक चलता है इस दौरान श्रद्धालु तीर्थस्थलों पर जाते हैं और पूजा अर्चना करते हैं
मुक्तसर का माघी मेला अपने इतिहास और धार्मिक महत्व के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध है यह मेला गुरु गोबिंद सिंह और उनके साहसिक कार्यों की याद दिलाता है मुक्तसर की धरती पर हुए युद्ध और साहस की गाथाएं आज भी लोगों के मन में जीवित हैं
मेला स्थल पर सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र नूरदीन की कब्र है यहाँ पर एक अनोखी परंपरा है जिसमें श्रद्धालु जूते और चप्पल फेंकते हैं यह कार्य गुरु गोबिंद सिंह को धोखा देने वाले नूरदीन के साथ अन्याय और विश्वासघात के प्रतीक के रूप में किया जाता है यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे श्रद्धालु बड़े हर्षोल्लास और विश्वास के साथ निभाते हैं
मेला स्थल पर धार्मिक समारोहों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं स्थानीय कलाकार लोकगीत और भजन प्रस्तुत करते हैं बच्चे और युवा मेले में खेल और प्रतियोगिताओं का आनंद लेते हैं बाजार में पारंपरिक व्यंजन और हस्तशिल्प की दुकानों की भीड़ रहती है
श्रद्धालु माघी मेला में भाग लेकर न केवल अपनी धार्मिक आस्था को प्रकट करते हैं बल्कि इतिहास और संस्कृति की जीवंत झलक भी देखते हैं यह मेला समाज में भाईचारा और एकता की भावना को मजबूत करता है लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर पूजा करते हैं और मेले का आनंद लेते हैं
मुक्तसर का माघी मेला न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है यह परंपरा और इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक माध्यम है इस मेले में भाग लेना श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष अनुभव है और यह पंजाब की संस्कृति की अमूल्य धरोहर को जीवित रखता है
इस प्रकार माघी मेला मुक्तसर में धार्मिक आस्था साहस और सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है जो हर वर्ष हजारों लोगों को आकर्षित करता है और इतिहास की जीवंत गाथाओं को याद दिलाता है.