नई दिल्ली :- भारत में लोकसभा सीटों का परिसीमन लंबे समय से रुका हुआ है और अगला बड़ा बदलाव 2026 के बाद संभव माना जा रहा है। वर्तमान में लोकसभा की कुल 543 सीटें हैं लेकिन जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने पर इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
क्या है मामला
परिसीमन का मतलब होता है जनसंख्या के आधार पर चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों की संख्या तय करना। 1971 की जनगणना के आधार पर सीटें तय की गई थीं और उसके बाद से सीटों पर रोक लगी हुई है ताकि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को नुकसान न हो।
संभावित बदलाव
अगर नई जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा होता है तो उत्तर भारत के बड़े राज्यों को फायदा मिल सकता है क्योंकि वहां जनसंख्या तेजी से बढ़ी है।उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर लगभग 120 या उससे ज्यादा हो सकती हैं। बिहार की सीटें 40 से बढ़कर 70 के आसपास पहुंच सकती हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी सीटों में बढ़ोतरी संभव है।
किन राज्यों को नुकसान
दक्षिण भारत के राज्यों में जनसंख्या वृद्धि कम रही है इसलिए वहां सीटों का अनुपात कम हो सकता है। तमिलनाडु केरल कर्नाटक आंध्र प्रदेश इन राज्यों में सीटें या तो स्थिर रह सकती हैं या कुल हिस्सेदारी घट सकती है।
कुल सीटें कितनी हो सकती हैं
विशेषज्ञ मानते हैं कि कुल लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 750 से 850 के बीच की जा सकती हैं ताकि सभी राज्यों को प्रतिनिधित्व संतुलित तरीके से मिल सके।
राजनीतिक असर
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ेगा
उत्तर भारत की राजनीतिक ताकत और बढ़ सकती है
दक्षिण भारत के राज्यों में प्रतिनिधित्व को लेकर बहस तेज हो सकती है।