बैसाखी के अवसर पर आयोजित ‘राष्ट्रीय त्रि-भाषाई मुशायरा’ सफलतापूर्वक संपन्न

 

 

100 से अधिक कवियों ने लिया भाग, नामी विद्वानों को किया गया सम्मानित

 

अमृतसर, 15 अप्रैल (के.एल. जीत वालिया) – बैसाखी के पावन पर्व के अवसर पर विश्व विरासती अकादमी, विश्व पंजाबी सभा कनाडा एवं अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच के संयुक्त तत्वावधान में अमीरा फार्म, एयरपोर्ट रोड, अमृतसर में कवियों का भव्य मेला आयोजित किया गया, जिसमें ‘राष्ट्रीय त्रि-भाषाई मुशायरा’ (पंजाबी, हिंदी, उर्दू) सफलतापूर्वक और यादगार ढंग से संपन्न हुआ। इस मुशायरे में भारत के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक कवियों ने भाग लिया।

 

इस कार्यक्रम का आयोजन विश्व विरासती अकादमी के चेयरमैन डॉ. परमजीत सिंह कलसी (नेशनल अवार्डी), विश्व पंजाबी सभा कनाडा (भारत इकाई) के प्रधान सतबीर सिंह एवं अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष बलविंदर कौर पंडोरी के सहयोग से किया गया।

 

कार्यक्रम में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर के यूथ सर्विसेज विभाग के डायरेक्टर डॉ. अमनदीप सिंह तथा प्रसिद्ध पंजाबी कवि डॉ. रविंदर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं डॉ. कुलबीर सिंह सूरी, समाजसेवी सतबीर सिंह, ग़ज़लगो मैनेजर अतर सिंह, विद्वान आलोचक डॉ. सर्वण सिंह, कथाकार देविंदर दीदार, फिल्म अभिनेता अरविंदर भट्टी, जिला शिक्षा अधिकारी एवं शायर हरपाल सिंह संधावालिया (स्टेट अवार्डी), समाजसेवी राजिंदर शर्मा तथा महिकप्रीत सिंह (जनरल सेक्रेटरी, अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच) विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।

 

समारोह की अध्यक्षता डॉ. परमजीत सिंह कलसी ने की। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए औपचारिक शुरुआत की, जबकि सतबीर सिंह ने सभी अतिथियों और कवियों का स्वागत किया।

 

कार्यक्रम के दौरान गुरजैपाल सिंह की पहली काव्य पुस्तक ‘गीत दी मौत’ तथा डॉ. गुरचरण गांधी की पत्रिका ‘सूही सवेर’ का लोकार्पण किया गया।

 

इस अवसर पर साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रसिद्ध शायर देविंदर सैफी को ‘पंजाबी कविता रत्न पुरस्कार’, डॉ. आंचल अरोड़ा को ‘रतन-ए-पंजाब (विरासती) पुरस्कार’ तथा विद्वान आलोचक डॉ. गुरवंत सिंह को ‘पंजाबी आलोचना रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

 

मुशायरे में देश-विदेश से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में कमलजीत सिंह कमल, अवतार सिंह सिद्धू, डॉ. गुरचरण गांधी, जसबीर सिंह झबाल, डॉ. सर्वण सिंह, करणैल सिंह असपाल (हरियाणा), डॉ. रूबी आरा (जम्मू-कश्मीर), राम सिंह (हिमाचल), डॉ. गुरकिरपाल सिंह काहलों, दुग्गल गुलाटी (दिल्ली), हरपाल सिंह संधावालिया, दुखभंजन (पुर्तगाल), हरजीत कौर बम्मराह (कनाडा), डॉ. जसविंदर कौर, डॉ. रमणदीप सिंह दीप, डॉ. सैली बलजीत, अशोक हस्तीर (उर्दू शायर), राजबीर कौर ग्रेवाल, हरप्रीत कौर मीत सहित सैकड़ों कवियों ने भाग लिया।

 

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, अध्यक्ष मंडल एवं कवियों को सम्मान चिन्ह, लोई और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया तथा उन्हें भविष्य में भी साहित्यिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।

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