चंडीगढ़, 11 जुलाई (के.एल. जीत वालिया):- साहित्य विज्ञान केंद्र, चंडीगढ़ द्वारा टी.एस. सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी, सेक्टर-17, चंडीगढ़ में एक विशेष साहित्यिक समारोह आयोजित किया गया, जिसमें प्रसिद्ध शायर परमिंदर सिंह अज़ीज़ की गीतों और ग़ज़लों की पुस्तक “इबादतनामा” का विधिवत लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडली में डॉ. दविंदर बोहा (पूर्व जिला भाषा अधिकारी, मोहाली), डॉ. परमजीत सिंह (एसोसिएट प्रोफेसर), लेखक परमिंदर सिंह अज़ीज़, गुरदर्शन सिंह मावी (अध्यक्ष, साहित्य विज्ञान केंद्र) तथा दविंदर कौर ढिल्लों शामिल थे।
संस्था के अध्यक्ष गुरदर्शन सिंह मावी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. दविंदर बोहा ने कहा कि किसी भी लेखक के लिए परिवार का सहयोग अत्यंत आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि ग़ज़ल समाज के मुद्दों को संवेदनशीलता से उठाती है। उन्होंने लेखक को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने ग़ज़ल को इबादत और गीत को प्रार्थना का स्वरूप दिया है डॉ. अवतार सिंह पतंग ने कहा कि वास्तविक साहित्य वही होता है जो स्वयं अभिव्यक्त होकर पाठकों और श्रोताओं को अपनी ओर आकर्षित करे। प्रवासी शायर जसपाल सिंह देसूवी ने कहा कि किसी उस्ताद के मार्गदर्शन के बिना प्रभावशाली ग़ज़ल लिखना कठिन होता है।
पंजाबी लेखक सभा के अध्यक्ष दीपक चनारथल ने कहा कि लेखक स्वयं जानता है कि वह क्या और क्यों लिख रहा है। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ पुस्तक वही होती है जो अनेक पुस्तकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए और पाठकों को पढ़ने के लिए प्रेरित करे।
पुस्तक पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत करते हुए डॉ. परमजीत सिंह ने कहा कि लेखक की ग़ज़लों में लय, भाव, संवेदना और उर्दू-पंजाबी साहित्य की गहरी समझ स्पष्ट दिखाई देती है।
लेखक परमिंदर सिंह अज़ीज़ ने बताया कि इबादतनामा शीर्षक उनकी आत्मा और कविता के आध्यात्मिक संबंध का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ग़ज़ल उनकी आत्मा का भोजन है और उन्होंने अपनी पसंदीदा ग़ज़ल भी श्रोताओं के साथ साझा की।
इस अवसर पर डॉ. मनजीत सिंह बल्ल, बलविंदर ढिल्लों, भरपूर सिंह, रतन बाबकवाला, प्रताप पारस गुरदासपुरिया और दविंदर कौर ढिल्लों ने पुस्तक से चुनिंदा रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम के अंत में गुरदर्शन सिंह मावी ने सभी अतिथियों और साहित्य प्रेमियों का धन्यवाद किया, जबकि मंच संचालन दविंदर कौर ढिल्लों ने प्रभावशाली ढंग से किया। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, कवियों, लेखकों तथा साहित्य प्रेमियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।