ब्रैम्पटन में 12वां विश्व पंजाबी सम्मेलन भव्य रूप से संपन्न

‘पंजाबी भाषा का भविष्य और शिक्षा का महत्व’ विषय पर विश्वभर के विद्वानों ने किया गंभीर मंथन

ब्रैम्पटन (कनाडा), 23 जुलाई (जोबनप्रीत सिंह वालिया):जगत पंजाबी सभा, ओंटारियो फ्रेंड्स क्लब (OFC) और पबपा सभा के संयुक्त तत्वावधान में 17 से 19 जुलाई 2026 तक कनाडा के ब्रैम्पटन में आयोजित 12वां विश्व पंजाबी सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।

 

सम्मेलन का मुख्य विषय “पंजाबी भाषा का भविष्य और शिक्षा का महत्व” रहा। इस अवसर पर दुनिया भर से आए विद्वानों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने विभिन्न सत्रों में अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए तथा पंजाबी भाषा के संरक्षण, विकास और शिक्षा में उसकी भूमिका पर विस्तार से विचार साझा किए।

 

तीन दिनों तक चले इस सम्मेलन के दौरान सभागार खचाखच भरे रहे, जिससे पंजाबी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति लोगों का उत्साह स्पष्ट दिखाई दिया। सम्मेलन की सफलता के लिए जगत पंजाबी सभा के चेयरमैन अजीब सिंह चट्ठा, अध्यक्ष सरदूल सिंह थियाड़ा, ओएफसी अध्यक्ष संतोष सिंह संधू, प्यारा सिंह कुदोवाल, बलविंदर सिंह चट्ठा (अमेरिका), रमनी बत्रा, बलविंदर कौर चट्ठा, त्रिप्ता सोढ़ी, रमिंदर वालिया, गोगणा तथा पूरी आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की गई।

 

विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में अमृतसर से पहुंचे भूपिंदर सिंह वालिया ने अपने विचारों और प्रभावशाली कविता-पाठ से श्रोताओं का मन मोह लिया। पहले दिन के शैक्षणिक सत्रों को भरपूर सराहना मिली, जबकि कवि सम्मेलन में लगभग 40 कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।

 

सम्मेलन में साहित्य, समाज सेवा, शिक्षा और राजनीति से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया, जिनमें पांच सांसद भी शामिल थे। अंतिम दिन रोज थिएटर में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, भांगड़ा प्रस्तुति और अतिथियों के सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

 

सम्मेलन के मुख्य अतिथि अमेरिका के प्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी दर्शन सिंह ढालीवाल रहे, जिन्होंने सम्मेलन के लिए 15 हजार कनाडाई डॉलर का योगदान दिया।

सम्मेलन के दौरान सभी अतिथियों के लिए चाय, नाश्ता, दोपहर और रात्रि भोजन की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई। कार्यक्रम को विभिन्न मीडिया संस्थानों ने व्यापक रूप से कवर किया।

 

सम्मेलन की समाप्ति के बाद देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों को विशेष बस के माध्यम से कनाडा की राजधानी ओटावा ले जाया गया, जहां उन्होंने संसद भवन का दौरा किया और गुरुद्वारा साहिब में भी मत्था टेका।

 

समापन समारोह में आयोजकों ने संकल्प दोहराया कि आने वाले वर्षों में भी पंजाबी भाषा के प्रचार-प्रसार और वैश्विक स्तर पर उसके सशक्तिकरण के लिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन निरंतर जारी रखा जाएगा।

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