लुधियाना, 24 जुलाई (के.एल. जीत वालिया): गुजरांवाला गुरु नानक खालसा कॉलेज, लुधियाना के प्रवासी साहित्य अध्ययन केंद्र द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘परवास’ के 48वें अंक का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पत्रिका का विमोचन प्रसिद्ध पंजाबी साहित्यकार गुरबचन सिंह जगपाल (सिडनी, ऑस्ट्रेलिया), डॉ. एस.पी. सिंह, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं गुजरांवाला खालसा एजुकेशनल काउंसिल के अध्यक्ष, प्रो. गुरभजन सिंह गिल, पंजाबी लोक विरासत अकादमी के चेयरमैन, हर्षरण सिंह नरूला, के.के. बावा, बाबा बंदा सिंह बहादुर फाउंडेशन के चेयरमैन तथा कॉलेज की प्राचार्य डॉ. राजिंदर कौर मल्होत्रा ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. एस.पी. सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि परवास का 48वां अंक पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करते हुए उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से आए साहित्यकार गुरबचन सिंह जगपाल के साहित्यिक योगदान और पंजाबी भाषा के प्रचार-प्रसार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कहा कि गुरबचन सिंह जगपाल लंबे समय से पंजाबी साहित्य की निरंतर सेवा कर रहे हैं और विश्वभर में पंजाबी भाषा के प्रचार के लिए समर्पित हैं। उन्होंने इस कॉलेज में अपने आगमन को एक पवित्र अवसर बताया।
गुरबचन सिंह जगपाल ने अपने विद्यार्थी जीवन और साहित्यिक सफर की यादें साझा करते हुए अपनी पहली कहानी “यह क्या” का उल्लेख किया तथा अपनी पुस्तक “बेनाम लोगों की बेनाम कहानियां” का परिचय भी उपस्थित श्रोताओं से कराया।कॉलेज की प्राचार्य डॉ. राजिंदर कौर मल्होत्रा ने सभी अतिथियों का धन्यवाद करते हुए प्रवासी साहित्य अध्ययन केंद्र के इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा की।
इस अवसर पर हर्षरण सिंह नरूला, हरदीप सिंह, डॉ. गुरइकबाल सिंह, कृष्ण कुमार बावा, शायर त्रैलोचन लोची, डॉ. गुरचरण कौर कोचर, डॉ. दलीप सिंह, प्रो. अमनप्रीत कौर, प्रो. मनजीत सिंह, प्रो. ऋषु जैन, प्रो. अनुप्रिया जैन, डॉ. बलकार सिंह, डॉ. परमजीत सिंह, डॉ. हरमनप्रीत सिंह गरचा तथा राजिंदर सिंह संधू सहित अनेक शिक्षाविद, साहित्यकार और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. तेजिंदर कौर, समन्वयक, प्रवासी साहित्य अध्ययन केंद्र ने किया।