ब्रैम्पटन, 5 अक्टूबर (जोबनप्रीत सिंह वालिया): जगत पंजाबी सभा और ओंटारियो फ्रेंड क्लब की ओर से 3 और 4 अक्टूबर को ब्रैम्पटन में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार और कवि दरबार पंजाबी साहित्य, कला और संस्कृति को समर्पित एक यादगार आयोजन बन गया। दोनों दिनों में वक्ताओं, कवियों, गायकों, युवा साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के पहले दिन ताहिर असलम गोरा ने रिबन काटकर सेमिनार का उद्घाटन किया। शमा रोशन करने की रस्म तरलोक सिंह काहलोन, मनिंदरजीत कौर पूर्ण, तोखी संघा, बाघा, त्रिपता सोढ़ी, संतोष सिंह संधू और संजीत सिंह ने निभाई। पहले सत्र का संचालन सरदूल सिंह थियाड़ा ने किया।
सेमिनार का दूसरा सत्र “भारत की आजादी के योद्धा” विषय को समर्पित रहा। इस सत्र का संचालन डॉ. रमनी बत्रा ने किया। करण अजीब सिंह संघा, प्रिंसिपल निरवैर सिंह अरोड़ा, राम सिंह औलख, सचवंत सिंह भट्टी नामधारी, ताहिर असलम गोरा, प्रिंसिपल झांझी और भूपिंदर सिंह वालिया ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े योद्धाओं और उनके बलिदानों पर प्रकाश डालते हुए श्रोताओं को ऐतिहासिक विरासत से जोड़ा।
इसके बाद आयोजित कवि दरबार में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को पंजाबी साहित्य के विभिन्न रंगों से रूबरू कराया। कवि दरबार का संचालन हलीमा सादिया ने किया। हीरा धालीवाल, हरजीत कौर और रणजीत कौर ने गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में संगीत का रंग भर दिया। गुरवेल सिंह ने कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग की।
दूसरे दिन, 4 अक्टूबर को विशेष कविता पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें 21 कवियों ने भाग लिया। हरिंदर कौर बराड़ ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और रिबन काटकर कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम का संचालन सरदूल सिंह थियाड़ा ने किया, जबकि कवि दरबार का संचालन संतोष सिंह संधू ने किया।
कविता पाठ प्रतियोगिता में तरलोक सिंह काहलोन, रुपिंदर कौर संधू, ज्ञान सिंह दरदी और जसपाल सिंह दासुवी ने निर्णायक की भूमिका निभाई। सभी कवियों ने निर्धारित समय का पालन करते हुए अपनी कविताएं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कीं। निर्णायकों के फैसले के अनुसार राम सिंह औलख ने पहला, भूपिंदर सिंह भोडे ने दूसरा और सुजान सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया।
इसके अलावा मनिंदरजीत कौर पूर्ण, रणजीत कौर, सुरिंदर सिंह सूर, गुरदास सिंह और अमरजीत सिंह को भी नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को युवा पीढ़ी से जोड़ने के लिए भी विशेष प्रयास किए गए। रामिंदर वालिया ने कवियों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित करने और नए युवा कवियों को मंच से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। युवा कवि गुरदास सिंह थब्बाल अपने साथ 20 युवा कवियों को लेकर कवि दरबार में पहुंचे। इनमें से 14 युवा कवियों ने कवि दरबार में अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
डॉ. रमनी बत्रा और बलविंदर कौर चट्ठा की ओर से प्रत्येक कवि को भागीदारी प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। युवा प्रतिभागियों को पदक देकर उनका उत्साह भी बढ़ाया गया।
जगत पंजाबी सभा के लिए दी गई सेवाओं के लिए रविंदर सिंह और संजीत सिंह को स्मृति चिह्न भेंट किए गए। इसी तरह कुलदीप सिंह गिल, दलजीत सिंह गैदू और कुलवंत कौर गैदू को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि हरिंदर कौर बराड़ और कार्यक्रम के प्रायोजकों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान हलीमा सादिया, हरजीत कौर, रणजीत कौर, परमप्रीत कौर बांगा, बेअंत कौर और ममता ने गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम की रौनक बढ़ाई। मुख्य अतिथि हरिंदर कौर बराड़ ने अपने अध्यक्षीय भाषण के बाद अपनी प्रसिद्ध कविता “भट्ठी वाली कुड़ी” प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं की ओर से खूब सराहना मिली।
कार्यक्रम के मुख्य सलाहकार भूपिंदर सिंह बाजवा ने बेहतर व्यवस्थाओं के लिए सरदूल सिंह थियाड़ा और संतोष सिंह संधू का विशेष धन्यवाद किया। कार्यक्रम की यादों को संजोने के लिए सामूहिक तस्वीर भी खिंचवाई गई। चाय-पानी का प्रबंध संतोष सिंह संधू और गुरचरण सिंह की ओर से किया गया।
अंत में जगत पंजाबी सभा के चेयरमैन अजीब सिंह चट्ठा ने मुख्य अतिथि, वक्ताओं, कवियों, निर्णायकों, प्रायोजकों, सहयोगियों और सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया। उन्होंने घोषणा की कि प्रत्येक महीने के पहले रविवार को कवि दरबार आयोजित किया जाएगा और कवियों तथा साहित्य प्रेमियों से इसमें बढ़-चढ़कर शामिल होने की अपील की।
इस तरह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार और कवि दरबार पंजाबी भाषा, साहित्य और संस्कृति की परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश देते हुए यादगार छाप छोड़ गया।