संत बाबा दलजीत सिंह के नेतृत्व में निकला नगर कीर्तन, गुरुद्वारा बख्शिश धाम ढोडीविंड में हुआ संपन्न

श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व को समर्पित नगर कीर्तन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया

चोगावां, 25 अक्टूबर (बागी): जगत गुरु धन-धन श्री गुरु नानक देव जी के पावन प्रकाश पर्व को समर्पित एक विशाल नगर कीर्तन का आयोजन गुरुद्वारा बख्शिश धाम, प्रीत नगर में किया गया। बख्शिश धाम के संस्थापक संत बाबा दलजीत सिंह के कुशल नेतृत्व में सजाए गए इस नगर कीर्तन में आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लिया।

धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत गुरुद्वारा साहिब में रखे गए श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के साथ हुई। इसके बाद संत बाबा दलजीत सिंह ने अरदास कर नगर कीर्तन को रवाना किया। फूलों से सुंदर ढंग से सजाई गई बस में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप सुशोभित था। नगर कीर्तन की अगुवाई पंज प्यारे कर रहे थे।

नगर कीर्तन के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। संगत कारों, बसों, जीपों, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और मोटरसाइकिलों पर सवार होकर गुरबाणी का जाप करती हुई आगे बढ़ रही थी। इससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में रंग गया।

प्रीत नगर से रवाना होकर जब नगर कीर्तन लोपोके पहुंचा, तो वहां राणा रणबीर सिंह लोपोके, डॉ. रविंदर पाल सिंह भुल्लर, सतिंदर पाल सिंह और डॉ. गुरभेज सिंह सहित अन्य सेवादारों ने इसका गर्मजोशी से स्वागत किया।

इसके बाद नगर कीर्तन कोहाला, वणियाके, बहिड़वाल और रणीके से गुजरता हुआ गुरुद्वारा बख्शिश धाम, ढोडीविंड पहुंचा, जहां श्रद्धा और उत्साह के साथ इसका समापन हुआ।

पूरे मार्ग में विभिन्न गांवों की संगतों की ओर से श्रद्धालुओं के लिए चाय, पकौड़े, मिठाइयों और फलों के अटूट लंगर लगाए गए। इस सेवा के माध्यम से संगत ने सिख परंपरा के सेवा, समर्पण और आपसी सहयोग के संदेश को आगे बढ़ाया।

इस धार्मिक अवसर पर राणा रणबीर सिंह लोपोके, मास्टर काबल सिंह संधू, सरपंच गुरसेवक सिंह गैवी, बाबा लखा सिंह, सचिव रशपाल सिंह, महिंदरजीत सिंह, प्रधान मनजीत सिंह और डॉ. गुरदीप सिंह सहित क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व को समर्पित इस नगर कीर्तन ने क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और सेवा का संदेश दिया तथा संगत को धार्मिक एकजुटता के सूत्र में बांधा।

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