पंजाब मीडिया टाइम्स वॉशिंगटन (के.एल. जीत वालिया)। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट में बहुमत हासिल करने के साथ ही प्रतिनिधि सभा में भी 218 सीटों का आंकड़ा पार कर बहुमत प्राप्त कर लिया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में कुल 435 सीटें हैं और सभी सीटों पर चुनाव हुए हैं। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने 231 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को 144 सीटें मिलीं।
वहीं, सीनेट की कुल 100 सीटों में से 35 सीटों पर चुनाव हुए। जारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 33 सीटों के नतीजे घोषित किए जा चुके हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 और रिपब्लिकन पार्टी ने 13 सीटें जीती हैं। बाकी दो सीटों पर मतगणना जारी है। इन नतीजों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के पास कुल 54 सीटें हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी के पास 44 सीटें हैं।
इसी तरह, 36 गवर्नर पदों में से 31 के नतीजे घोषित हो चुके हैं। इनमें डेमोक्रेट्स ने 20 और रिपब्लिकन पार्टी ने 11 सीटों पर जीत हासिल की है। पांच राज्यों में मतगणना जारी है।
### हार के बाद ट्रंप चलेंगे अपना आखिरी ब्रह्मास्त्र
चुनाव में हार के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह विपक्ष के दबाव में अपनी नीतियों से पीछे नहीं हटेंगे। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनके पास आखिरी शक्ति के रूप में ‘वीटो’ का अधिकार है और जरूरत पड़ने पर वह इसका इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें “मिस्टर वीटो” कहे जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
गौरतलब है कि ट्रंप वीटो पावर का इस्तेमाल कर विपक्ष की ओर से लाए गए कई विधायी प्रस्तावों को रोक सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी कांग्रेस दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रपति के वीटो को पलट भी सकती है।
अब्दुल अल-सईद बनेंगे अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर
इस बीच, डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन में जीत हासिल की है। इसके साथ ही वह अमेरिकी इतिहास में सीनेटर के रूप में चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बन गए हैं।
ट्रंप ने अब्दुल पर आतंकवादियों का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए उन्हें खुले तौर पर “जिहादी” भी कहा था। इतना ही नहीं, ट्रंप ने 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों का जिक्र करते हुए अल-सईद की तुलना विमान अपहरणकर्ताओं से भी की थी।
क्या ट्रंप की हार से भारत की चिंता बढ़ेगी या कम होगी?
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बाद संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इसका असर व्यापार, टैरिफ और H-1B वीजा जैसे मुद्दों पर पड़ने की संभावना है।
भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों के लिए आव्रजन नियमों को लेकर बहस तेज हो सकती है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यकारी शक्तियां बरकरार रहेंगी।