अमृतसर, 6 मई (के.एल. जीत वालिया):“पुराने वेतनमान, पुरानी पेंशन और भत्ते बहाली मोर्चा” की ओर से अपनी लंबे समय से लंबित वित्तीय मांगों को लेकर विरसा विहार, अमृतसर में एक विशाल कन्वेंशन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम डी.टी.एफ. के राज्य वित्त सचिव एवं जिला प्रधान अश्वनी अवस्थी की अगुवाई में हुआ, जिसके बाद रोष मार्च भी निकाला गया।
मोर्चे की प्रमुख मांगों में 17 जुलाई 2020 या उसके बाद भर्ती कर्मचारियों के लिए पंजाब वेतनमान बहाल करना, 1 जनवरी 2004 या उसके बाद भर्ती कर्मचारियों के लिए 1972 आधारित पुरानी पेंशन योजना बहाल करना तथा 37 प्रकार के भत्तों में तार्किक संशोधन शामिल हैं।
सभा को संबोधित करते हुए पुरानी पेंशन प्राप्ति फ्रंट पंजाब के माझा जोन कन्वीनर गुरबिंदर सिंह खैहरा, पंजाब स्टेट वेटरनरी इंस्पेक्टर एसोसिएशन के परमिंदर सिंह माहल, 6635 अध्यापक यूनियन के मलकीत सिंह, 569 लेक्चरर यूनियन के मनप्रीत सिंह, जिला कन्वीनर सुखजिंदर सिंह और कंवलजीत कौर ने कहा कि संघर्ष का मुख्य उद्देश्य 17 जुलाई 2020 की अधिसूचना को रद्द करवाना और छठे पंजाब वेतन आयोग की 15% वृद्धि के अनुसार वेतन तय करवाना है।
उन्होंने यह भी मांग की कि 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती कर्मचारियों पर लागू नई पेंशन योजना (NPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए। साथ ही 37 बंद किए गए भत्तों, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र भत्ता, बॉर्डर एरिया भत्ता, एसीपी स्कीम का लाभ और लंबित 18% महंगाई भत्ता शामिल है, को बहाल करने की मांग की गई।
नेताओं ने घोषणा की कि 17 मई 2026 को मोहाली में राज्य स्तरीय रैली आयोजित की जाएगी, जिसके बाद चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री निवास की ओर रोष मार्च निकाला जाएगा। इसके लिए आने वाले दिनों में जिले भर में व्यापक तैयारी और जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा।
डेमोक्रेटिक मुलाजिम फेडरेशन के राज्य प्रधान जरमनजीत सिंह छज्जलवड्डी और राज्य महासचिव हरदीप सिंह टोडरपुर ने पंजाब सरकार द्वारा कर्मचारियों की मांगें पूरी न करने के लिए वैश्विक आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने एकजुटता और सामूहिक संघर्ष की आवश्यकता पर जोर देते हुए भविष्य के आंदोलनों को इसी आधार पर आगे बढ़ाने की अपील की।
इस अवसर पर डीटीएफ अमृतसर के पूर्व प्रधान सुखराज सिंह सरकारिया, पूर्व महासचिव लखविंदर सिंह गिल, जिला वित्त सचिव हरजाप सिंह बल्ल, राज्य कमेटी सदस्य गुरदेव सिंह, जिला प्रेस सचिव राजेश कुमार पराशर सहित कई अन्य नेता और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।