प्रधानमंत्री का पंजाब दौरा केवल राजनीतिक कार्यक्रम बनकर रह गया, पंजाब को न कोई बड़ी सौगात मिली और न ही प्रमुख मुद्दों का समाधान: रंधावा और बाजवा

चंडीगढ़, 18 जुलाई (के.एल. जीत वालिया):- पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, वरिष्ठ नेता एवं विधायक त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा, विधायक सुखबिंदर सिंह सरकारिया, बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा, हरप्रताप सिंह अजनाला तथा भगवंत पाल सिंह सचर ने संयुक्त बयान जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों को इस दौरे से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन यह केवल भाषणों और राजनीतिक संदेशों तक सीमित रह गया। उनके अनुसार, पंजाब को कोई नई बड़ी सौगात नहीं मिली और राज्य के किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर ठोस घोषणा नहीं की गई।

रंधावा ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर केंद्र सरकार ने सिख कैदियों की रिहाई से संबंधित अधिसूचना जारी की थी तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेरा बाबा नानक में करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के समय सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने की बात कही थी। इससे सिख समुदाय में उम्मीद जगी थी कि बंदी सिखों के मामले का मानवीय और न्यायपूर्ण समाधान निकलेगा। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री ने अपने पंजाब दौरे के दौरान इस लंबे समय से लंबित और संवेदनशील मुद्दे का कोई उल्लेख नहीं किया, जिससे सिख समुदाय में निराशा पैदा हुई।

उन्होंने कहा कि पंजाब देश का सबसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है, जहां पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थ, आधुनिक हथियार और गोला-बारूद भेजे जा रहे हैं। उनके अनुसार, यह केवल पंजाब ही नहीं बल्कि पूरे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समस्या से निपटने के लिए न तो कोई नई रणनीति घोषित की गई और न ही केंद्रीय एजेंसियों को और मजबूत करने की बात कही गई।

रंधावा ने एफबीआई (FBI) से जुड़ी सार्वजनिक जानकारी और न्यायालयी दस्तावेजों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनसे कई गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री को इन मुद्दों पर अपना स्पष्ट पक्ष रखना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय छवि और कानून के शासन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है उन्होंने कहा कि पंजाब लंबे समय से अपनी सीमावर्ती स्थिति को देखते हुए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग करता रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, उद्योगों के पुनर्जीवन, युवाओं के रोजगार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की अपेक्षाएं भी इस दौरे में पूरी नहीं हुईं।

रंधावा ने कहा कि किसान आज भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी का इंतजार कर रहे हैं। फसल विविधीकरण, किसानों के कर्ज और कृषि को लाभकारी बनाने के संबंध में भी कोई नई घोषणा नहीं की गई। इसी प्रकार उद्योग जगत महंगी बिजली, घटते निवेश और रोजगार की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन इस दिशा में भी कोई ठोस योजना सामने नहीं आई।

उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग अब केवल वादों से नहीं बल्कि सरकारों के कामकाज के आधार पर उन्हें परखेंगे। कांग्रेस पार्टी पंजाब के अधिकारों, सिख समुदाय की भावनाओं, किसानों, युवाओं, व्यापारियों और सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की आवाज़ उठाती रहेगी तथा केंद्र सरकार से उन सभी वादों का जवाब मांगती रहेगी जो पंजाब से किए गए लेकिन अब तक पूरे नहीं हुए।

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