शिक्षा विभाग ने लेखक डॉ. परमजीत कलसी की 29 पुस्तकों को शैक्षणिक संस्थानों की लाइब्रेरियों के लिए दी स्वीकृति

अमृतसर, 13 दिसंबर (के.एल. जीत वालिया): पंजाब सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा गठित राज्य स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने पंजाब के प्रख्यात विद्वान लेखक, प्रबुद्ध आलोचक, भाषा विज्ञानी, वरिष्ठ शिक्षाविद तथा गुरदासपुर व अमृतसर के पूर्व जिला भाषा अधिकारी (स्टेट व नेशनल अवार्डी) डॉ. परमजीत सिंह कलसी की 29 पुस्तकों को प्रदेश की शैक्षणिक संस्थाओं की लाइब्रेरियों में शामिल करने की स्वीकृति प्रदान की है।

डॉ. परमजीत सिंह कलसी एक बहुआयामी साहित्यकार हैं, जिन्होंने कहानी (1 संग्रह), नाटक (1 संग्रह), आलोचना (3 संग्रह), बाल-काव्य, बाल-नाटक एवं बाल-कथा सहित बाल साहित्य के 16 संग्रह, संपादन के 17 संग्रह, भाषा-विज्ञान (1 संग्रह), ज्ञानावलियां (4 संग्रह), चिह्न-विज्ञान सहित कुल 45 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। इसके अतिरिक्त, उनके साहित्यिक सृजन और शोध कार्य पर आधारित 3 पुस्तकें अन्य विद्वान लेखकों द्वारा संपादित की जा चुकी हैं।

डॉ. कलसी ने स्कूल शिक्षा विभाग से संबंधित दो अध्यापक प्रशिक्षण मॉड्यूल भी लिखे हैं। उल्लेखनीय है कि उनकी दो कहानियां — ‘कपूतों से तो बहुएं अच्छी’ और ‘पुत्र की चिता’ — पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल हैं।वर्तमान में डॉ. परमजीत सिंह कलसी पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड में पर्यावरण शिक्षा, स्वागत जीवन एवं पंजाबी विषय के क्षेत्रीय विषय विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दे रहे हैं तथा इन विषयों की पुस्तकों के संपादक और समीक्षक भी हैं। उन्होंने अब तक बोर्ड की 24 से अधिक पुस्तकों और 9 अंतरराष्ट्रीय पंजाबी ओलंपियाड मॉड्यूलों की समीक्षा की है।

इसके अतिरिक्त, डॉ. कलसी ने 100 से अधिक शोध पत्र लिखे हैं, जो देश-विदेश के विभिन्न कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और संगोष्ठियों में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। उन्होंने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी और पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से दो शोध प्रबंध भी पूर्ण किए हैं।

शिक्षा विभाग में डॉ. परमजीत सिंह कलसी ऐसे विद्वान शिक्षाविद हैं, जिन्होंने 70 से अधिक लेखकों की पुस्तकों की भूमिकाएं भी लिखी हैं। पंजाब सरकार द्वारा स्वीकृत हजारों पुस्तकों की सूची में वे ऐसे एकमात्र शिक्षक-लेखक हैं, जिनकी सर्वाधिक 29 पुस्तकें स्वीकृत हुई हैं।

मुलाकात के दौरान डॉ. कलसी ने बताया कि भविष्य में वे ऐतिहासिक पहल से जुड़ी कुछ और महत्वपूर्ण पुस्तकें पंजाबी साहित्य को समर्पित करेंगे।

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