आत्मनिर्भर भारत से महिला उद्यमिता को नई दिशा: खादी, निर्यात और सहकारिता में बढ़ते अवसर

भारत सरकार के “आत्मनिर्भर भारत” अभियान ने देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ महिलाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना, रोजगार के अवसर पैदा करना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।

 

 

 

 

इसी दिशा में केंद्र सरकार महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं और सब्सिडी चला रही है। स्टैंड अप इंडिया योजना के तहत महिलाओं को 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) क्षेत्र में महिलाओं को बिना गारंटी के ऋण, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दी जा रही है।

 

 

 

 

खादी और ग्रामोद्योग में महिलाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन

 

 

 

 

खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार विशेष योजनाएं चला रही है। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के माध्यम से महिलाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है—

 

 

 

 

स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण

 

 

 

 

PMEGP (प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम) के तहत सब्सिडी आधारित ऋण

 

 

 

 

कच्चे माल और उपकरणों पर सहायता

 

 

 

 

 

 

 

इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।

 

 

 

 

महिला निर्यातकों के लिए योजनाएं और बजटीय प्रावधान

 

 

 

 

महिलाओं को निर्यात क्षेत्र में आगे लाने के लिए सरकार द्वारा विशेष पहल की गई हैं। निर्यात प्रोत्साहन परिषदों और संस्थानों के माध्यम से महिला उद्यमियों को उपलब्ध कराया जा रहा है—

 

 

 

 

अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी हेतु वित्तीय सहायता

 

 

 

 

बाजार से जुड़ाव और प्रशिक्षण

 

 

 

 

ECGC के माध्यम से निर्यात ऋण एवं बीमा सुविधाएं

 

 

 

 

 

 

 

हालिया केंद्रीय बजट में महिला उद्यमिता और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। MSME, कौशल विकास तथा महिला एवं बाल विकास से संबंधित योजनाओं में महिलाओं के लिए विशेष आवंटन सुनिश्चित किया गया है।

 

 

 

 

महिलाओं के लिए प्राथमिकता और आरक्षण

 

 

 

 

सरकारी योजनाओं और सब्सिडी में महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। कई योजनाओं में शामिल हैं—

 

 

 

 

ऋण वितरण में महिलाओं के लिए विशेष कोटा

 

 

 

 

स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को प्राथमिकता

 

 

 

 

GeM के माध्यम से सरकारी खरीद में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन

 

 

 

 

 

 

 

सहकारिता के माध्यम से सशक्तिकरण

 

 

 

 

सहकारिता क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी मजबूत की जा रही है। दुग्ध उत्पादन, हस्तशिल्प, कृषि और खादी जैसे क्षेत्रों में महिला सहकारी समितियों को प्रोत्साहित कर सामूहिक उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।

 

 

 

 

निष्कर्ष

 

 

 

 

“आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत खादी, निर्यात और सहकारिता के क्षेत्रों में महिलाओं के लिए बढ़ते अवसर इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार महिला सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। योजनाओं, सब्सिडी और बजटीय प्रावधानों के माध्यम से आज महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

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