डॉ. नेहा, हांडा, महाजन और भाटिया ने लोगों से ऊर्जा बचत के प्रति जागरूक होने की अपील की

 

 

 

 

स्वदेशी जागरण मंच ने “ऊर्जा आत्मनिर्भरता” विषय पर विस्तृत रिपोर्ट जारी की

 

अमृतसर, 19 मई (के.एल. जीत वालिया) — स्वदेशी जागरण मंच के शोध प्रकोष्ठ स्वदेशी शोध संस्थान द्वारा “ऊर्जा आत्मनिर्भरता” विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई। इस रिपोर्ट में भारत की आयातित कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी पर बढ़ती निर्भरता को कम करने तथा ऊर्जा-सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए एक रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।

 

 

 

 

इस संबंध में बातचीत करते हुए डॉ. नेहा तेजपाल, सीए अमित हांडा, सीए भावेश महाजन, पीयूष भाटिया, श्री केशव और अन्य कार्यकर्ताओं ने बताया कि भारत हर वर्ष लगभग 165 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 14 लाख करोड़ रुपये हाइड्रोकार्बन आयात पर खर्च करता है। देश अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत और एलपीजी की आवश्यकता का लगभग 64 प्रतिशत विदेशों से आयात करता है।

 

 

 

 

रिपोर्ट के अनुसार भारत प्रतिदिन कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी के आयात पर लगभग 3200 करोड़ से 3770 करोड़ रुपये तक खर्च कर रहा है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ता है और भारत वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरताओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनता जा रहा है।

 

 

 

 

संस्थान ने कहा कि अब समय आ गया है कि ऊर्जा संरक्षण को राष्ट्र सेवा और आर्थिक देशभक्ति के रूप में देखा जाए। नागरिकों को ऊर्जा-कुशल जीवनशैली अपनाने का संदेश देते हुए कहा गया कि ट्रैफिक सिग्नलों पर वाहनों के इंजन बंद रखना, ईंधन-कुशल गति से वाहन चलाना, कारपूलिंग को बढ़ावा देना, सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करना और अनावश्यक ईंधन खपत कम करना समय की आवश्यकता है।

 

 

 

 

रिपोर्ट में घरेलू स्तर पर भी ऊर्जा संरक्षण पर जोर दिया गया। गृहिणियों को प्रेशर कुकर का उपयोग करने, नियंत्रित आंच पर भोजन पकाने, अनाज को पहले भिगोने तथा इंडक्शन कुकिंग और सौर ऊर्जा आधारित प्रणालियां अपनाने की सलाह दी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि इंडक्शन कुकिंग प्रणाली पारंपरिक एलपीजी आधारित खाना पकाने की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल है और इससे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम की जा सकती है।

 

 

 

 

रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशों में “राष्ट्रीय ई-कुकिंग मिशन” शुरू करने का सुझाव भी शामिल है, जिसके तहत ऑफ-पीक घंटों में बिजली दरों को एलपीजी से काफी सस्ता बनाया जाए, ताकि लोग तेजी से बिजली आधारित खाना पकाने वाली प्रणालियां अपनाएं।

 

 

 

 

संस्थान ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा, रोजगार सृजन और दीर्घकालिक सतत विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आवश्यकता है।

 

 

 

 

स्वदेशी शोध संस्थान ने नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और देशवासियों से “ऊर्जा आत्मनिर्भरता” को जन आंदोलन बनाने और वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। इस मौके पर डॉ. नेहा तेजपाल, सीए अमित हांडा, सीए भावेश महाजन, पीयूष भाटिया और अन्य वक्ताओं ने लोगों से ऊर्जा बचत के प्रति जागरूक होने की अपील की।

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