विषय: गुरमत विचारधारा की रोशनी में प्रकृति संरक्षण
अमृतसर, 2 जून (के.एल. जीत वालिया) – ऑल इंडिया पिंगलवाड़ा चैरिटेबल सोसायटी (रजि.), अमृतसर के संस्थापक भगत पूरन सिंह की 122वीं जयंती को समर्पित तीन दिवसीय कार्यक्रमों का शुभारंभ पिंगलवाड़ा परिसर में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गुरबाणी के पवित्र शब्द “बलिहारी कुदरत वसिया” के गायन से हुई।
पहले दिन पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से “गुरमत विचारधारा की रोशनी में प्रकृति संरक्षण” विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया गया।
पिंगलवाड़ा संस्था की मुख्य सेवादार डॉ. इंदरजीत कौर ने आए हुए विद्वानों और श्रोताओं का स्वागत करते हुए कहा कि भगत पूरन सिंह एक ऐसी महान शख्सियत थे, जो पूरी मानवता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए चिंतित रहते थे। उन्होंने कहा कि लगभग 100 वर्ष पहले ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया था।
खालसा कॉलेज के डीन डॉ. इंदरजीत सिंह गोगोआणी ने अपने संबोधन में कहा कि भगत पूरन सिंह पर्यावरण और मानवता के सच्चे प्रहरी थे। उन्होंने कहा कि उनकी जयंती पर पर्यावरण की रक्षा करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रदूषित होता पर्यावरण मनुष्यों और जीव-जंतुओं के अस्तित्व के लिए खतरा बन रहा है तथा गुरबाणी भी प्रकृति संरक्षण पर विशेष बल देती है।
तख्त श्री दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार गियानी केवल सिंह ने कहा कि भगत पूरन सिंह ने वर्ष 1927 से ही लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करना शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि उस समय व्यक्त की गई उनकी चिंताएं आज सच साबित हो रही हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि जल प्रदूषण के कारण लोगों को बोतलबंद पानी पीना पड़ रहा है।
बाबा सेवा सिंह खडूर साहिब की ओर से उपस्थित सूबेदार बाबा बलबीर सिंह ने कहा कि आधुनिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में मनुष्य स्वयं पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने लोगों से प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने और अपने जीवनकाल में कम से कम 20 पेड़ लगाने का आह्वान किया।
कृषि अर्थशास्त्री और लेखक डॉ. सरबजीत सिंह छीना ने कहा कि भले ही स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरण विषय पढ़ाया जा रहा है, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर पर्याप्त कार्य नहीं हो रहा। उन्होंने सरकारों और जनता से पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
प्रिंसिपल कुलवंत सिंह ने कहा कि पेड़ों के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने लोगों को अपने घरों और छतों पर फल और सब्जियां उगाने की सलाह दी तथा स्वस्थ जीवन के लिए शुद्ध भोजन को आवश्यक बताया।
सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे विधायक डॉ. कुंवर विजय प्रताप सिंह ने कहा कि डॉ. इंदरजीत कौर, भगत पूरन सिंह की तरह पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ता शहरीकरण पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है और भविष्य में भूजल की उपलब्धता भी संकट में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि बढ़ता तापमान मनुष्यों, पशु-पक्षियों, पौधों और फसलों के अस्तित्व के लिए खतरा है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने “बूटे लाइए” (आओ पेड़ लगाएं) कविता प्रस्तुत की, जबकि कवि कमलजीत सिंह नीलों ने अपनी कविताओं से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन अमरजीत सिंह ने किया। उपस्थित विद्वानों और अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया तथा पूरे कार्यक्रम के दौरान गुरु का अटूट लंगर चलता रहा।
इस अवसर पर पिंगलवाड़ा के पदाधिकारी, विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।