चौक मेहता, 2 जून (तरसेम सिंह रंधावा):- दमदमी टकसाल के प्रमुख एवं संत समाज के अध्यक्ष संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा के मार्गदर्शन में गुरुद्वारा गुरदर्शन प्रकाश, मेहता में जून 1984 के तीसरे घल्लूघारे के समस्त शहीदों की पावन स्मृति को समर्पित 42वें शहीदी जोड़ मेले के अंतर्गत शहीदी सप्ताह के दूसरे दिन शाम के गुरमत समागम अत्यंत श्रद्धा के साथ आयोजित किए गए।
इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने दमदमी टकसाल पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और गुरु घर में मत्था टेककर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। संगतों की बड़ी संख्या में उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि सिख कौम के महान शहीदों के प्रति आज भी लोगों के मन में अथाह प्रेम, सम्मान और समर्पण की भावना मौजूद है।
समागम की शुरुआत श्री हरिमंदिर साहिब के हजूरी रागी भाई शुभदीप सिंह के जत्थे द्वारा गुरबाणी के मधुर शब्द-कीर्तन से हुई। इसके बाद संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा ने गुर प्रताप सूरज ग्रंथ में वर्णित छठे पातशाह के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की व्याख्या की।
उन्होंने जून 1984 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सिख इतिहास धर्म की रक्षा के लिए दी गई महान शहादतों, संघर्षों और बलिदानों से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसे शहीदी समागम नई पीढ़ी को अपने इतिहास, विरसे और शहीदों की कुर्बानियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने संगतों को गुरबाणी, गुरमत और सिख रहित मर्यादा के अनुसार जीवन व्यतीत करने तथा कौम की चढ़दी कला के लिए प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शहीदों की कुर्बानियों के प्रति संगतों की अटूट श्रद्धा कौमी जागरूकता का प्रतीक है।
समागम के दौरान भाई सतनाम सिंह ने पोथी पाठ की सेवा निभाई, जबकि प्रिंसिपल गुरदीप सिंह रंधावा ने मंच संचालन करते हुए उपस्थित धार्मिक हस्तियों और दूर-दराज़ से आई संगतों का धन्यवाद किया। साथ ही आगामी शहीदी समागमों, अमृत संचार और विशेष धार्मिक कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की गई।
कार्यक्रम के अंत में शहीदों की स्मृति में अरदास की गई तथा कौम की चढ़दी कला, सरबत के भले और पंथक एकता के लिए प्रार्थना की गई। पूरा वातावरण गुरबाणी, शहीदी स्मृतियों और आध्यात्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत रहा, जिसने उपस्थित संगतों के मन पर गहरी छाप छोड़ी। इस अवसर पर संत बाबा गुरदेव सिंह तरसिक्का, बाबा गुरभेज सिंह खुजाला, बाबा नवतेज सिंह चेलेआणा साहिब, बाबा स्विंदर सिंह टाहली साहिब, बाबा गुरमीत सिंह बडोवाल, बाबा बलविंदर सिंह कैलिया वाले, बाबा सुखवंत सिंह चन्नणके, भाई अजीब सिंह अभ्यासी, जत्थेदार बाबा अजीत सिंह, जत्थेदार सुखदेव सिंह, प्रिंसिपल हर्षदीप सिंह रंधावा, डॉ. अवतार सिंह बुट्टर सहित अनेक धार्मिक, सामाजिक एवं पंथक हस्तियां तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।