अमृतसर, 1 अप्रैल (के.एल. जीत वालिया, मनप्रीत सेठी) – शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान जाने वाले यात्रियों से प्रवेश शुल्क वसूलने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गुरुद्वारा साहिबानों के दर्शन के लिए जाने वाले सिख श्रद्धालुओं को इस निर्णय से बाहर रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा साहिबानों के दर्शन करना हर सिख की आस्था से जुड़ा विषय है और सरकार के इस फैसले का सीधा असर श्रद्धालुओं पर पड़ेगा।
एडवोकेट धामी ने बताया कि मिली जानकारी के अनुसार भारत सरकार ने पाकिस्तान जाने वाले यात्रियों से 200 रुपये जाते समय और 200 रुपये वापस आते समय प्रवेश शुल्क लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि देश विभाजन के समय बिछड़े गुरुधामों के दर्शन की इच्छा हर सिख के मन में रहती है और इसके लिए संगत लगातार अरदास करती है।
उन्होंने कहा कि गुरुपर्वों और ऐतिहासिक अवसरों पर शिरोमणि कमेटी द्वारा सिख श्रद्धालुओं के जत्थे पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारों के दर्शन के लिए भेजे जाते हैं, ऐसे में श्रद्धालुओं से प्रवेश शुल्क लेना किसी भी तरह से उचित नहीं है।
एडवोकेट धामी ने कहा कि शिरोमणि कमेटी पहले से ही गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब, पाकिस्तान के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं से पाकिस्तान सरकार द्वारा लिए जाने वाले 20 डॉलर शुल्क को समाप्त करने की मांग करती रही है। अब भारत सरकार के नए फैसले से सिख श्रद्धालुओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसा कोई भी निर्णय लागू न किया जाए जिससे सिख श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचे और इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए।